मिश्रित खेती को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है?

आज के समय में कृषि केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन से भी गहराई से जुड़ी हुई है। तेजी से बदलते मौसम, मिट्टी की उर्वरता में गिरावट और बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिश्रित खेती (Mixed Farming) एक प्रभावी और टिकाऊ समाधान बनकर उभरी है। इसमें किसान एक ही खेत में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन आदि को भी अपनाते हैं।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मिश्रित खेती को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है और इसके लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जा सकते हैं।

मिश्रित खेती क्या है?

मिश्रित खेती एक ऐसी कृषि प्रणाली है जिसमें किसान केवल फसल उत्पादन पर निर्भर नहीं रहते। इसमें पशुपालन, बागवानी, डेयरी, पोल्ट्री फार्मिंग, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियाँ भी शामिल होती हैं। इसका मुख्य लाभ यह है कि किसान की आय कई स्रोतों से होती है, जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।

मिश्रित खेती एक ही खेत में कई फसलें और पशुपालन जोड़कर उत्पादन बढ़ाने की प्रभावी तकनीक है, जो छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित होती है। यह मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए आय को दोगुना-तिगुना कर सकती है।

मुख्य लाभ

मिश्रित खेती से उत्पादन लागत कम होती है क्योंकि एक ही व्यय में कई फसलें उगाई जा सकती हैं।
यह मिट्टी को उर्वर रखती है, कीट-रोगों का जोखिम घटाती है और एक फसल असफल होने पर भी आय सुनिश्चित करती है।
किसानों को विविध आय स्रोत मिलते हैं, जैसे फसल बिक्री के साथ पशुधन से दूध या खाद।

अपनाने की तकनीक

सबसे पहले संगत फसलें चुनें, जैसे तिलहन (मूंगफली, तिल), दलहन (अरहर, उड़द), अनाज (ज्वार, बाजरा) और मसाले (हल्दी)।
सीड ड्रिल से तिलहन बोएं, 1.5-2 फीट दूरी पर दलहन और मसाले लगाएं, फिर अनाज की बुवाई करें।
पशुपालन जोड़ें या इंटरक्रॉपिंग जैसे पपीता-धनिया अपनाएं; कम पानी वाली जमीन पर ड्रिप इरिगेशन उपयोगी।

आय वृद्धि के उपाय

रबी में गेहूं-चना-सरसों या खरीफ में 3-4 फसलें लेकर साल भर आय सुनिश्चित करें।
सरकारी योजनाओं जैसे RKVY या KVK प्रशिक्षण लें, जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं।
उदाहरण: छोटे खेतों पर यह मॉडल 2-3 गुना मुनाफा देता है, बाजार उतार-चढ़ाव से बचाता है

मिश्रित खेती के प्रमुख फायदे

1. आर्थिक स्थिरता

यदि किसी वर्ष फसल खराब हो जाए तो पशुपालन या अन्य गतिविधियों से आय बनी रहती है।

2. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना

पशुओं का गोबर और जैविक अपशिष्ट खेतों की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है।

3. रोजगार के अवसर

परिवार के सभी सदस्य खेती और सहायक गतिविधियों में भाग लेकर रोजगार पा सकते हैं।

4. पोषण सुरक्षा

फसलों के साथ दूध, अंडा, फल, सब्ज़ी और मछली जैसी पोषण सामग्री उपलब्ध रहती है।

5. पर्यावरण संरक्षण

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है।

मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के तरीके

1. किसानों को जागरूक करना

किसानों को मिश्रित खेती के लाभों और तकनीकों के बारे में जानकारी देना जरूरी है। कृषि मेलों, कार्यशालाओं और किसान क्लबों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा सकती है।

2. आधुनिक तकनीक का प्रयोग

    • कम्पोस्टिंग यूनिट से जैविक खाद तैयार करना।

3. सरकारी योजनाओं का लाभ

केंद्र और राज्य सरकारें मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं, जैसे:

    • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना

    • राष्ट्रीय पशुधन मिशन

    • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

4. सहकारी समितियाँ और FPO का गठन

छोटे और बिखरे खेतों में किसानों के सहयोग से संसाधनों का साझा उपयोग संभव है, जिससे लागत कम और उत्पादन बढ़ता है।

5. जैविक खेती को बढ़ावा देना

किसान गोबर, वर्मी कम्पोस्ट और हरे खाद का उपयोग करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकते हैं।

6. बागवानी और फसल विविधीकरण

गेहूँ, धान या मक्का के साथ आम, अमरूद, पपीता और केला जैसे फलदार पेड़ लगाकर आय में वृद्धि की जा सकती है।

7. पशुपालन और डेयरी

गाय-भैंस, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्मिंग और मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय और खाद की उपलब्धता होती है।

8. डिजिटल प्लेटफॉर्म और मार्केटिंग

किसान अपने उत्पाद ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बेच सकते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है।

9. अनुसंधान और नवाचार

कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान नई फसल किस्में और तकनीक प्रदान कर सकते हैं।

10. युवाओं को कृषि से जोड़ना

स्टार्टअप, एग्री-टेक और एग्रो-टूरिज्म जैसे अवसर युवाओं को खेती में आकर्षित कर सकते हैं।


मिश्रित खेती का भविष्य

भारत में मिश्रित खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यदि इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने में मदद मिल सकती है।


FAQ Section

Q1: मिश्रित खेती क्या है?
A1: फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और डेयरी जैसी गतिविधियाँ अपनाने की कृषि प्रणाली।

Q2: इसके फायदे क्या हैं?
A2: आर्थिक स्थिरता, मिट्टी की उर्वरता, रोजगार के अवसर, पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण।

Q3: किसान इसे कैसे बढ़ावा दे सकते हैं?
A3: जागरूकता, आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाएँ, सहकारी समितियाँ, डिजिटल मार्केटिंग और अनुसंधान।

Q4: इसमें कौनकौन सी गतिविधियाँ शामिल हैं?
A4: फसल उत्पादन, पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री फार्मिंग, मत्स्य पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन।

Q5: क्या इससे आय बढ़ सकती है?
A5: हाँ, आय के कई स्रोत होने से किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहते हैं।

मिश्रित खेती

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