कुछ विशेष राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा अतिरिक्त अनुदान दिया जाता है, खासकर आपदा राहत, ग्रामीण स्थानीय निकायों, राजस्व घाटा, आदि मदों में। केंद्र प्रायोजित योजनाओं में पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता अनुपात मिलता है.
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Toggleअतिरिक्त अनुदान प्राप्त करने वाले प्रमुख राज्य (2024–25)
- बिहार, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी:2024 में बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात जैसे आपदाओं से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ₹1280.35 करोड़ अतिरिक्त सहायता दी गई — सबसे अधिक बिहार को लगभग ₹589 करोड़ मिले.
- पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड:15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को करोड़ों रुपये के अनुदान 2024–25 में जारी किए गए; इनमें पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों को सीधा लाभ.
- त्रिपुरा, कर्नाटक:15वें वित्त आयोग अनुदान के रूप में 2024–25 में ग्रामीण विकास और पंचायत संस्थाओं के लिए राज्य विशेष अतिरिक्त ग्रांट जारी की गई.
- पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्य:केंद्र प्रायोजित योजनाओं MGNREGA, PMGSY, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आदि में इन राज्यों को 90:10, अन्य राज्यों को 60:40, या 75:25 का रोशल फंड रेशियो मिलता है; इसमें केंद्र की हिस्सेदारी ज्यादा रहती है.
केंद्र अतिरिक्त अनुदान का प्रमुख आधार
- आपदाग्रस्त क्षेत्र, विशेष श्रेणी राज्य, कमज़ोर राजस्व स्थिति.
- पंचायती राज, ग्राम पंचायत की मजबूती हेतु.
- बागवानी, कृषि यंत्र, और अन्य केंद्रीय स्कीम में पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को ज्यादा ग्रांट अनुपात.
- केंद्र और राज्य के बीच विभिन्न योजनाओं में वांछित अनुपात की मांग बढ़ रही है, वर्तमान में राज्यों को टैक्स राजस्व का 41% हिस्सा मिलता है.
राज्य विशेष सहायता के लिए बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, त्रिपुरा, हिमाचल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पूर्वोत्तर राज्यों को केंद्र से अन्य राज्यों के मुकाबले अलग या अधिक अनुदान प्राप्त होता है, जिनमें संसद, केंद्रीय मंत्रालय, वित्त आयोग की सिफारिशें व राष्ट्रीय आपदा राहत तंत्र अहम भूमिका निभाते हैं.