दलहन मिशन और PM-Kisan के मुख्य लाभ और सीमाएँ क्या हैं?

दालहन मिशन और पीएमकिसान दोनों योजनाएँ किसानों के लिए उल्लेखनीय लाभ पहुंचाती हैं, लेकिन कुछ सीमाएँ भी हैं। दोनों योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, उत्पादन को बढ़ाना और कृषि को टिकाऊ बनाना है.​

राष्ट्रीय दलहन (पल्सेस) आत्मनिर्भरता मिशन

मुख्य लाभ:

  • दालों के उत्पादन को 2030-31 तक 350 लाख टन तक बढ़ाने का लक्ष्य, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी.​
  • 416 विशेष जिलों में किसानों के लिए नई किस्मों के बीज, नि:शुल्क बीज किट, मशीनीकरण व तकनीकी सहायता.​
  • सरकार अरहर, उड़द, मसूर की 100% एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद की गारंटी देती है, जिससे किसानों को बाजार से बेहतर भाव मिल सके.​
  • 1,000 नई प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना के लिए प्रति यूनिट 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी.​
  • मृदा स्वास्थ्य सुधार, जलवायु प्रति सहनशील किस्में, और फसल विविधिकरण से पर्यावरणीय लाभ.​

मुख्य सीमाएँ:

  • एमएसपी नीति में अधिकांश खरीद गेहूं/धान के पक्ष में रहती है, जिससे दाल उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन सीमित दिखता है.​
  • प्रोसेसिंग और भंडारण अवसंरचना अभी राज्यों में असमान रूप से फैली है, जिससे छोटे किसानों के लिए फायदा सीमित हो सकता है.​
  • बीज वितरण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार प्रबंधन की कई व्यवस्थाएँ जिलों में समान रूप से लागू नहीं है, जिससे लक्ष्य प्राप्ति में अड़चन आती है.​