भारत में मिश्रित खेती (Mixed Cropping in India): मिश्रित खेती किसानों के लिए फायदेमंद खेती पद्धति

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ करोड़ों किसान खेती-किसानी पर निर्भर हैं। आज जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़, और कीट-रोग जैसी चुनौतियाँ खेती को जोखिमपूर्ण बना रही हैं।

ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए भारत में मिश्रित खेती (Mixed Cropping in India) एक बेहतरीन विकल्प है। यह पद्धति किसानों को अधिक उपज, बेहतर आमदनी और प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा प्रदान करती है।

मिश्रित खेती क्या है? (What is Mixed Cropping in Hindi)
मिश्रित खेती (Mixed Cropping) वह पद्धति है जिसमें एक ही खेत में दो या अधिक फसलें साथ-साथ बोई जाती हैं। इन फसलों का चुनाव वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है ताकि वे एक-दूसरे का पूरक बनें और उत्पादन क्षमता बढ़ाएँ। उदाहरण के लिए – गेहूँ + चना, धान + अरहर, गन्ना + आलू + पपीता + अदरक + हल्दी आदि।
  सरल शब्दों में, यह खेती किसानों को एक ही खेत से दोहरी या तिहरी उपज देने का अवसर देती है।

भारत में मिश्रित खेती के लाभ (Benefits of Mixed Cropping in India)
जोखिम कम होता है (Risk Reduction)
यदि एक फसल प्राकृतिक कारणों से खराब हो जाए तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है (Soil Fertility Improvement)
दलहनी फसलें (जैसे अरहर, मूंग, चना) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करती हैं, जिससे मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।
संसाधनों का अधिकतम उपयोग (Maximum Utilization of Resources)
धूप, पानी और खाद का संतुलित उपयोग होता है।
ऊँची फसलें (जैसे मक्का, गन्ना) और नीची फसलें (जैसे मूंगफली, आलू) एक-दूसरे को सहयोग देती हैं।
कीट एवं रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control)
फसल विविधता से कीटों और रोगों का प्रभाव कम होता है।
अतिरिक्त आमदनी (Extra Income)
किसान को एक ही खेत से कई फसलों की उपज मिलती है, जिससे नकदी फसलों और खाद्यान्न दोनों का लाभ होता है।
भारत में प्रमुख मिश्रित फसलें (Major Mixed Cropping Examples in India)
गेहूँ + चना (Wheat + Gram)
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में लोकप्रिय।
चना मिट्टी में नाइट्रोजन जोड़ कर गेहूँ की पैदावार बढ़ाता है।
धान + अरहर (Rice + Pigeon Pea)
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में।
धान पानी ज्यादा लेता है, अरहर गहरी जड़ों से नमी लेती है।
गन्ना + आलू / सरसों (Sugarcane + Potato / Mustard)
उत्तर प्रदेश और पंजाब में।
गन्ना लंबी अवधि की फसल है, जब तक वह तैयार होती है, आलू और सरसों से किसानों को अतिरिक्त आय मिल जाती है।
मक्का + मूंगफली (Maize + Groundnut)
महाराष्ट्र और कर्नाटक में।
मक्का ऊँचा होता है और मूंगफली जमीन पर फैलकर मिट्टी को ढक लेती है।
कपास + मूंग / उड़द (Cotton + Pulses)
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में।
दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती हैं।
पपीता + अदरक + हल्दी (Papaya + Ginger + Turmeric)
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में।
पपीता लंबी अवधि की बागवानी फसल है।
अदरक और हल्दी औषधीय एवं मसाला फसलें हैं।
किसानों को एक साथ फल, मसाले और औषधीय उत्पाद से कई गुना आमदनी होती है।

उत्तर प्रदेश में मिश्रित खेती (Mixed Cropping in Uttar Pradesh)
उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रमुख मिश्रित फसलें:
गेहूँ + चना
गन्ना + आलू
धान + अरहर
सरसों + चना
पपीता + अदरक + हल्दी
N ये Mixed Cropping Examples in Uttar Pradesh किसानों को अधिक लाभ देने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बनाए रखते हैं।

चुनौतियाँ और सावधानियाँ (Challenges in Mixed Cropping)
सही फसल चयन जरूरी है: यदि दो फसलें एक जैसी पोषण आवश्यकता वाली हों तो उत्पादन घट सकता है।
प्रबंधन की जटिलता: खाद, पानी और निराई-गुड़ाई का सही तालमेल जरूरी है।
बाजार की उपलब्धता: औषधीय और मसाला फसलों का सही मूल्य तभी मिलेगा जब उचित बाजार जुड़ा हो।

सरकार और वैज्ञानिक पहल (Government & Research Support)
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि विश्वविद्यालय किसानो को मिश्रित खेती के लिए नए मॉडल प्रदान कर रहे हैं।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) जैसी योजनाएँ किसानों को संसाधन और तकनीकी सहयोग दे रही हैं।
कई राज्यों में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों को मिश्रित खेती के प्रशिक्षण देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ on Mixed Cropping in India)
Q1. मिश्रित खेती क्यों जरूरी है?
  यह खेती जोखिम कम करती है, मिट्टी की सेहत सुधारती है और किसानों की आय बढ़ाती है।
Q2. पपीता + अदरक + हल्दी की खेती क्यों फायदेमंद है?
  इससे किसानों को फल, मसाले और औषधीय उत्पाद एक साथ मिलते हैं। यह एक High Profit Mixed Cropping System है।
Q3. उत्तर प्रदेश में सबसे अच्छी मिश्रित फसलें कौन-सी हैं?
  गेहूँ-चना, गन्ना-आलू, धान-अरहर, सरसों-चना और पपीता-अदरक-हल्दी।

निष्कर्ष (Conclusion on Mixed Cropping in India)
मिश्रित खेती (Mixed Cropping in India) किसानों के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी खेती पद्धति है। यह न केवल उत्पादन बढ़ाती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करती है।
विशेष रूप से पपीता + अदरक + हल्दी जैसी मिश्रित खेती किसानों को नकदी फसल, औषधीय फसल और बागवानी से एक साथ लाभ देती है। आने वाले समय में यदि अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएँगे तो भारत में न केवल खाद्यान्न सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि किसानों की आय भी कई गुना बढ़ेगी।

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